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ब्रह्म-कमल

The Cosmic Lotus

अन्य नाम Loka-padma (the world-lotus)

नाभि से उद्भव और ब्रह्मा का उस पर अवस्थान

भा. ३.८.१३ में भगवान् के भीतर का अर्थ, रजस् से भी सूक्ष्मतर, कालानुगत गुण से विद्ध होकर नाभि-देश से भिन्न होता है। भा. ३.८.१४ में वह पद्मकोश सहसा उदित होकर विशाल जल को अपने तेज से प्रकाशित करता है। भा. ३.८.१६ में ब्रह्मा उसकी कर्णिका पर खड़े होकर व्योम में परिक्रमण करते हैं और चार मुख प्राप्त करते हैं। भा. ३.८.१९ में वे नाभिकमल की जड़ खोजने के लिये नाड़ी से नीचे उतरते हैं और उसे नहीं पाते।