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त्वष्टा

Tvashtar

नेत्र के लोकपाल; रूपों की प्राप्ति का कारण

विराट् के दोनों नेत्र विदीर्ण होने पर लोकपाल त्वष्टा ने प्रवेश किया, और अपनी अंश-चक्षु से रूपों की प्राप्ति होती है: 'निर्भिन्ने अक्षिणी त्वष्टा लोकपालोऽविशद्विभोः । चक्षुषांशेन रूपाणां प्रतिपत्तिर्यतो भवेत्' (भा. ३.६.१५)।