Sanatan Info

बीटा AI
देवता
साझा करें
WhatsApp Facebook X / Twitter Instagram Gmail ईमेल Telegram

त्वष्टा

Tvashtar

त्वष्टा — देवता, विराट्-पुरुष के नेत्रों के लोकपाल। भा. ३.६.१५ में मैत्रेय कहते हैं: 'निर्भिन्ने अक्षिणी त्वष्टा लोकपालोऽविशद्विभोः । चक्षुषांशेन रूपाणां प्रतिपत्तिर्यतो भवेत्' — विराट् के दोनों नेत्र विदीर्ण होने पर त्वष्टा ने उनमें प्रवेश किया, और उनकी अंश-चक्षु से ही रूपों की प्रतिपत्ति होती है। इस अध्याय की इन्द्रिय-क्रम में वे दृष्टि के अधिष्ठाता हैं। तीसरे स्कन्ध में उनका यही एक उल्लेख है।

श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.6.15 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)