भगवान् स्वयं खड़े रहते हुए परमेष्ठी के आसन पर बैठे उग्रसेन को 'आप ठहरें' कहकर संबोधित करते हैं: 'तिष्ठन्निषण्णं परमेष्ठिधिष्ण्ये न्यबोधयद्देव निधारयेति' (भा. ३.२.२२)।
राजा
उग्रसेन
Ugrasena
अन्य नाम आहुकः
उग्रसेन — मथुरा के यदुवंशी राजा, कंस के पिता। पुत्र कंस ने उन्हें सिंहासन से उतारकर बन्दी बना लिया था; कंस-वध के पश्चात् कृष्ण ने स्वयं राज्य न लेकर उन्हें पुनः राजा बनाया — यह कृष्ण की निःस्पृहता का प्रसिद्ध उदाहरण है। द्वारका में भी वे यादव-सभा के अध्यक्ष रहे। भा. १.११.१७ में वे वसुदेव और अक्रूर के साथ कृष्ण के स्वागत के लिए आगे आते हैं।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.11.18 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110182)
परमेष्ठी के आसन पर प्रतिष्ठापन