'कामं दहतु मां नाथ मा मे गर्भो निपात्यताम्' (भा. १.८.१०)।
उत्तरा
Uttara
अन्य नाम वैराटी
उत्तरा — मत्स्य-नरेश विराट की कन्या, अभिमन्यु की पत्नी और परीक्षित की माता। भा. १.८.८–१० में अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से भयभीत होकर वे कृष्ण की शरण में दौड़ती हैं और अपने प्राणों के बदले गर्भ की रक्षा माँगती हैं — 'भले ही वह मुझे जला दे, किन्तु मेरा गर्भ न गिराया जाए'। भगवान् ने अपनी माया से उस गर्भ को आवृत कर कुरु-वंश की परम्परा सुरक्षित रखी (भा. १.८.१४)।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.8.8 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=196197)
उत्तरा का विराट के साथ सम्बन्ध: पुत्री। स्रोत प्रमाण (SB 1.8.14): उत्तरा विराट की कन्या है: 'वैराट्याः' (भा. १.८.१४) — विराट-कन्या का गर्भ। दिशा: कन्या → पिता। प्रमाण: प्रत्यक्ष (मातृ/पितृ-वाचक तद्धित)।
Wife Abhimanyu राजाउत्तरा का अभिमन्यु के साथ सम्बन्ध: पत्नी। स्रोत प्रमाण (SB 1.8.14): उत्तरा अभिमन्यु की पत्नी है; भा. १.८.१४ का गर्भ 'कुरुतन्तवे' अर्थात् कुरु-वंश की परम्परा के लिए रक्षित है, और वही गर्भ परीक्षित है (भा. १.१२)। अभिमन्यु उस समय मारा जा चुका था। प्रमाण: प्रबल साक्ष्य।
माता Maharaja Parikshit राजाउत्तरा का महाराज परीक्षित के साथ सम्बन्ध: माता। स्रोत प्रमाण (SB 1.8.14): परीक्षित उत्तरा का पुत्र है: भा. १.८.१४ में हरि ने उत्तरा के गर्भ की रक्षा की और वही गर्भ परीक्षित के रूप में जन्मा। दिशा: पुत्र → माता। प्रमाण: प्रबल साक्ष्य।