Sanatan Info

बीटा AI
Group
साझा करें
WhatsApp Facebook X / Twitter Instagram Gmail ईमेल Telegram

वैश्य

Vaishyas

वैश्य — वर्ण, पुरुष की ऊरुओं से उत्पन्न। भा. ३.६.३२ में: 'विशोऽवर्तन्त तस्योर्वोर्लोकवृत्तिकरीर्विभोः । वैश्यस्तदुद्भवो वार्तां नृणां यः समवर्तयत्' — ऊरुओं से लोक-वृत्ति करने वाली शक्ति प्रवर्तित हुई, और वैश्य उससे उत्पन्न होकर मनुष्यों की वार्ता का सम्यक् संचालन करता है। 'वार्ता' शब्द यहाँ जीविका के व्यापार-पथ को कहता है।

श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.6.32 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)