'रसातलगतां महीमुद्धरिष्यन्... सौकरं वपुः' (भा. १.३.७)।
वराह
Varaha
अन्य नाम सौकरं वपुः · Sukara-vapu (the boar form)
वराह — विष्णु का तृतीय अवतार (भागवत-क्रम में द्वितीय): सूकर-रूप धारणकर रसातल में डूबी पृथ्वी का उद्धार करने वाले; पुराण-परम्परा में हिरण्याक्ष-वध भी इनसे जुड़ा है (यह अंश प्रसंगवशात् संसाधित पदों में नहीं)। भा. १.३.७: 'यज्ञेशः सौकरं वपुः' धारण कर पृथ्वी को उठाया — लोक-कल्याण हेतु।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.3.7 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=369178)
यज्ञेशः ने सौकर वपु धारण किया: 'यज्ञेशः सौकरं वपुः' (भा. १.३.७)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।
वराह ने रसातल में डूबी पृथ्वी को उठाया: 'रसातलगतां महीमुद्धरिष्यन्' (भा. १.३.७)। दिशा सत्यापित। प्रमाण: प्रत्यक्ष।