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वेदव्यास

Vyasa

अन्य नाम बादरायण · द्वैपायनः · महामुनि · कृष्णद्वैपायनः · कृपणवत्सलः · धर्मवित् · Badarayana · Dvaipayana

वेदविदों में श्रेष्ठ

'यानि वेदविदां श्रेष्ठो भगवान् बादरायणः' (भा. १.१.७)।

वियोग-व्याकुल 'पुत्र!' पुकार

विरह-व्याकुल द्वैपायन ने जाते पुत्र को पुकारा: 'द्वैपायनो विरहकातर आजुहाव पुत्रेति' (भा. १.२.२)।

अल्पमेधसों हेतु वेदतरु-शाखाकरण

'चक्रे वेदतरोः शाखा दृष्ट्वा पुंसोऽल्पमेधसः' (भा. १.३.२१)।

कारण-निदान: भागवत-धर्म अभी विस्तार से निरूपित नहीं

'किं वा भागवता धर्मा न प्रायेण निरूपिताः' (भा. १.४.३१)।

भगवान् के सुहृत् और सखा

भा. ३.४.९ में द्वैपायन को भगवान् का 'सुहृत्सखा' कहा गया है; वे सिद्ध होकर लोकों का अनुचरण करते हुए यदृच्छा से सरस्वती तट पर भगवान् के पास आ पहुँचे: 'द्वैपायनसुहृत्सखा । लोकाननुचरन् सिद्ध आससाद यदृच्छया'।

वेदव्यास — foremost knower of — वेद

बादरायण (व्यास) वेदविदों में श्रेष्ठ हैं: 'वेदविदां श्रेष्ठो भगवान् बादरायणः' (भा. १.१.७)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

वेदव्यास — avatara of — श्रीकृष्ण

सप्तदश: सत्यवती-पराशर से जात वेद-विभाजक व्यास — भा. १.१-२ के व्यास ही: 'सप्तदशे जातः सत्यवत्यां पराशरात्' (भा. १.३.२१)। समान-व्यक्तिता १.१.२/१.१.७/१.२.२-३ से सत्यापित। प्रमाण: जन्म प्रत्यक्ष; सूची-तादात्म्य प्रबल साक्ष्य।

वेदव्यास — divided — वेद

अल्प-मेधस् मनुष्यों को देखकर उन्होंने वेद-तरु की शाखाएँ विभाजित कीं: 'चक्रे वेदतरोः शाखाः' (भा. १.३.२१)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

वेदव्यास — born in — द्वापरयुग

व्यास द्वापर (तृतीय युग-पर्यय) में जन्मे: 'द्वापरे समनुप्राप्ते तृतीये युगपर्यये' (भा. १.४.१४)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

वेदव्यास — kala of — श्रीकृष्ण

व्यास हरि की कला रूप में जन्मे: 'जातः पराशराद्योगी वासव्यां कलया हरेः' (भा. १.४.१४)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

वेदव्यास — composed — महाभारत

करुणा से व्यास ने भारत-माख्यान रचा: 'इति भारतमाख्यानं कृपया मुनिना कृतम्' (भा. १.४.२५)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।