जँभाई लेते समय उनके मुख में भुवनों को देखकर शङ्कित मन वाली गोपी प्रबुद्ध हो गईं: 'यज्जृम्भतोऽस्य वदने भुवनानि गोपी संवीक्ष्य शङ्कितमनाः प्रतिबोधितासीत्' (भा. २.७.३०)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।
यशोदा
Yashoda
यशोदा नन्द की पत्नी और गोकुल में कृष्ण की पालक माता हैं, जिनका वात्सल्य वैष्णव भक्ति में मातृ-भाव का आदर्श माना जाता है। दामोदर-लीला में वे माखन चुराने पर उन्हें ऊखल से बाँधना चाहती हैं, किन्तु जो भी रस्सी लाई जाती है वह दो अङ्गुल छोटी पड़ जाती है — जब तक भगवान् स्वयं बँधना स्वीकार न करें। भा. २.७.३० में दोनों प्रसङ्ग एक ही श्लोक में हैं: रस्सी का छोटा पड़ना, और जँभाई लेते समय उनके मुख में समस्त भुवनों का दर्शन, जिससे शङ्कित होकर वे 'प्रतिबोधिता' — प्रबुद्ध — हो गईं; किन्तु भागवत यह भी कहता है कि वह प्रबोध क्षणिक था और वात्सल्य पुनः लौट आया।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 2.7.30 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=200170)