राजा
ययाति
Yayati
ययाति — नहुष के पुत्र, चन्द्रवंशी सम्राट्; देवयानी और शर्मिष्ठा के पति। शुक्राचार्य के शाप से अकाल-वृद्धत्व प्राप्त होने पर उन्होंने पुत्र पुरु से यौवन उधार लिया और सहस्र वर्ष भोग भोगने के पश्चात् यह अनुभव कर कि 'भोगों से तृष्णा कभी शान्त नहीं होती, अपितु घृत डालने से अग्नि की भाँति बढ़ती है', यौवन लौटाकर वन चले गए — यह उपाख्यान वैराग्य की प्रसिद्ध शिक्षा है। यदु और पुरु उन्हीं के पुत्र हैं, अतः यदुवंश और कुरुवंश दोनों उनसे निकले। भा. १.१२.२४ में परीक्षित को 'ययाति के समान धार्मिक' कहा गया है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.12.24 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110183)