'कलाः सर्वे हरेरेव' (भा. १.३.२७); 'मथ्नताम्' (१.३.१६); 'अपाययत्सुरान्' (१.३.१७)।
देवगण
Devas (the suras)
देवगण (सुर) — हिन्दू धर्म के दिव्य शक्तियाँ: इन्द्र, अग्नि, वायु आदि के नेतृत्व वाला लोक, जो असुरों के विरुद्ध नैतिक व्यवस्था का पक्ष लेता है। संसाधित पदों में: इन्होंने असुरों सहित मन्दराचल से सागर मथा (भा. १.३.१६); मोहिनी से अमृत पान किया (१.३.१७); और ये — ऋषि-मनु-प्रजापतियों सहित — हरि की कलाएँ हैं (१.३.२७)।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.3.16 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=369178)
अपनी भिन्नता के कारण देवता अपनी-अपनी क्रिया में असमर्थ हो गये और अञ्जलि बाँधे विभु से बोले (भा. ३.५.३७); उन्होंने स्वीकार किया कि वे अपने-अपने विहार में तन्त्र होकर भगवान् के प्रतिहार को नहीं कर सकते: 'सर्वे वियुक्ताः स्वविहारतन्त्रं न शक्नुमस्तत्प्रतिहर्तवे ते' (भा. ३.५.४७), और अपनी शक्ति से स्वचक्षु की याचना की (भा. ३.५.५०)।
देवों ने असुरों के साथ मन्दराचल से सागर मथा: 'सुरासुराणामुदधिं मथ्नतां मन्दराचलम्' (भा. १.३.१६)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।