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देवगण

Devas (the suras)

सृष्टि-कार्य में असमर्थता का स्वीकार और भगवान् से प्रार्थना

अपनी भिन्नता के कारण देवता अपनी-अपनी क्रिया में असमर्थ हो गये और अञ्जलि बाँधे विभु से बोले (भा. ३.५.३७); उन्होंने स्वीकार किया कि वे अपने-अपने विहार में तन्त्र होकर भगवान् के प्रतिहार को नहीं कर सकते: 'सर्वे वियुक्ताः स्वविहारतन्त्रं न शक्नुमस्तत्प्रतिहर्तवे ते' (भा. ३.५.४७), और अपनी शक्ति से स्वचक्षु की याचना की (भा. ३.५.५०)।

देवगण — churned ocean with — मन्दराचल

देवों ने असुरों के साथ मन्दराचल से सागर मथा: 'सुरासुराणामुदधिं मथ्नतां मन्दराचलम्' (भा. १.३.१६)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।