इरावती
Iravati
इरावती — मत्स्य-राजकुमार उत्तर की कन्या और परीक्षित की पत्नी; विराट की पौत्री तथा उत्तरा की भतीजी। भा. १.१६.२ के अनुसार परीक्षित ने उनसे विवाह किया और उनसे जनमेजय आदि चार पुत्र उत्पन्न हुए। इस प्रकार कुरु-वंश की परम्परा, जो अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से एक बार टूटते-टूटते बची थी (भा. १.८.१४), उन्हीं के द्वारा आगे बढ़ी। कुछ पुराणों में उन्हें 'मादravती' नाम से भी उल्लिखित किया गया है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.16.2 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=148532)
इरावती का महाराज परीक्षित के साथ सम्बन्ध: पत्नी। स्रोत प्रमाण (SB 1.16.2): परीक्षित ने उत्तर की कन्या इरावती से विवाह किया: 'स उत्तरस्य तनयामुपयेम इरावतीम्' (भा. १.१६.२)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।
माता Janamejaya राजाइरावती का जनमेजय के साथ सम्बन्ध: माता। स्रोत प्रमाण (SB 1.16.2): जनमेजय इरावती का पुत्र है: 'तस्याम्' (भा. १.१६.२) — उसी इरावती से चार पुत्र उत्पन्न हुए। दिशा: पुत्र → माता। प्रमाण: प्रत्यक्ष।
पुत्री Uttara (prince of Matsya) राजाइरावती का उत्तर के साथ सम्बन्ध: पुत्री। स्रोत प्रमाण (SB 1.16.2): इरावती उत्तर की कन्या है: 'स उत्तरस्य तनयाम्' (भा. १.१६.२) — यह उत्तर मत्स्य-राजकुमार, उत्तरा के भ्राता हैं। दिशा: कन्या → पिता। प्रमाण: प्रत्यक्ष।