भा. ३.८.७ में सनत्कुमार को 'निवृत्तिधर्माभिरताय' — निवृत्ति-धर्म में रत — कहा गया है, और भगवत्तम ने उन्हें यह कहा। पृष्ट होने पर उन्होंने व्रतधारी साङ्ख्यायन को आगे कहा। वे कुमारों में से एक हैं, किन्तु इस श्लोक में उनका पृथक् नाम आता है।
सनत्कुमार
Sanatkumara
सनत्कुमार — ऋषि, कुमारों में से एक, जिन्हें भागवत की परम्परा में संकर्षण से उपदेश मिला। भा. ३.८.७ में मैत्रेय कहते हैं: 'प्रोक्तं किलैतद्भगवत्तमेन निवृत्तिधर्माभिरताय तेन । सनत्कुमाराय स चाह पृष्टः साङ्ख्यायनायाङ्ग धृतव्रताय' — भगवत्तम ने निवृत्ति-धर्म में रत सनत्कुमार को यह कहा, और पृष्ट होने पर सनत्कुमार ने व्रतधारी साङ्ख्यायन को आगे कहा। वे कुमार-समूह के सदस्य हैं, किन्तु इस श्लोक में उनका पृथक् नाम आता है, इसलिये उन्हें समूह से भिन्न सत्ता के रूप में रखा गया है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 3.8.7 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर अध्याय-पृष्ठ; देवनागरी पाठ सत्यापित प्रतिलिपि से — validation/sanskrit_skandha3.json)
सनत्कुमार का संकर्षण के साथ सम्बन्ध: शिष्य। स्रोत प्रमाण (SB 3.8.7): भा. ३.८.७ में कहा गया है कि भगवत्तम ने निवृत्ति-धर्म में रत सनत्कुमार को यह कहा: 'प्रोक्तं किलैतद्भगवत्तमेन निवृत्तिधर्माभिरताय तेन । सनत्कुमाराय स चाह पृष्टः साङ्ख्यायनायाङ्ग धृतव्रताय'। अतिरिक्त प्रमाण (SB 3.8.7): सनत्कुमार का संकर्षण के साथ सम्बन्ध: शिष्य। स्रोत प्रमाण (SB 3.8.7): भा. ३.८.७ में सनत्कुमार को भगवत्तम द्वारा यह उपदिष्ट बताया गया है, और पृष्ट होने पर उन्होंने आगे साङ्ख्यायन को कहा।
पुत्र Brahma देवतासनत्कुमार का ब्रह्मा के साथ सम्बन्ध: पुत्र। स्रोत प्रमाण (SB 3.12.4): भा. ३.१२.४ में सनत्कुमार को आत्मभू (ब्रह्मा) द्वारा सृजित चार मुनियों में गिना गया है: 'सनत्कुमारं च मुनीन्निष्क्रियानूर्ध्वरेतसः'।