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शमीक

Shamika

अन्य नाम आङ्गिरसः

पुत्र के शाप पर सन्तप्त; अपने अपमान को नहीं गिना

'स्वयं विप्रकृतो राज्ञा नैवाघं तदचिन्तयत्' (भा. १.१८.४९); 'अल्पीयसि द्रोह उरुर्दमो धृतः' (भा. १.१८.४१)।