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शेष

Shesha

अन्य नाम दशशताननः

शेष अथवा अनन्त सहस्र फणों वाले वे नागराज हैं जिन पर क्षीरसागर में भगवान् विष्णु शयन करते हैं और जो समस्त लोकों को अपने फणों पर धारण किए हुए हैं; कल्पान्त में उनके मुखों से निकली अग्नि से संहार होता है, जिसका उल्लेख भा. २.२.२६ में भी है। बलराम को उनका अवतार माना जाता है। भा. २.७.४१ में उनका सर्वाधिक मार्मिक उल्लेख है: 'गायन् गुणान् दशशतानन आदिदेवः शेषोऽधुनापि समवस्यति नास्य पारम्' — सहस्र मुखों से अनादि काल से भगवान् के गुण गाते हुए भी वे आज तक उनका पार नहीं पा सके, जो भगवत्-महिमा की अनन्तता का सर्वोत्तम प्रमाण है।

श्रीमद्भागवतमहापुराण 2.7.41 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=200170)