शूरसेन
Shurasena
शूर (शूरसेन) — यदुवंशी राजा, देवमीढ के पुत्र और मथुरा-मण्डल के अधिपति; वसुदेव तथा कुन्ती (पृथा) के पिता, अतः कृष्ण के पितामह और पाण्डवों के मातामह। उन्होंने अपनी कन्या पृथा को नि:सन्तान मित्र कुन्तिभोज को गोद दे दिया था, जिससे वे 'कुन्ती' कहलाईं। भा. १.१४.२६ में युधिष्ठिर उन्हें 'मातामह' कहकर उनका कुशल पूछते हैं — यही वचन कुन्ती और वसुदेव के भाई-बहन सम्बन्ध का, और इस प्रकार कृष्ण के पाण्डवों का 'मातुलेय' होने का, शास्त्रीय आधार है।
श्रीमद्भागवतमहापुराण 1.14.26 — संस्कृत विकिस्रोत (स्थिर oldid=110185)
शूरसेन का वसुदेव के साथ सम्बन्ध: पिता। स्रोत प्रमाण (SB 1.14.26): वसुदेव शूर के पुत्र हैं: भा. १.१४.२६ में युधिष्ठिर शूर को अपना 'मातामह' और वसुदेव को 'मातुल' कहते हैं — अर्थात् शूर कुन्ती और वसुदेव दोनों के पिता। दिशा: पुत्र → पिता। प्रमाण: प्रबल साक्ष्य।
पिता Kunti Humanशूरसेन का कुन्ती के साथ सम्बन्ध: पिता। स्रोत प्रमाण (SB 1.14.26): कुन्ती शूर की कन्या हैं: 'शूरो मातामहः' (भा. १.१४.२६) — युधिष्ठिर के मातामह, अर्थात् माता कुन्ती के पिता। दिशा: कन्या → पिता। प्रमाण: प्रत्यक्ष।