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धृतराष्ट्र

Dhritarashtra

अन्य नाम आजमीढः · कुरुपतिः

विदुर के उपदेश से स्नेह-पाश काटकर गृह-त्याग

'छित्त्वा स्वेषु स्नेहपाशान्द्रढिम्नो निश्चक्राम भ्रातृसन्दर्शिताध्वा' (भा. १.१३.२९) — 'प्रज्ञाचक्षुः', नेत्रहीन होकर भी प्रज्ञा से देखने वाले।

हिमालय में योग-साधना से देह-त्याग

'जितासनो जितश्वासः प्रत्याहृतषडिन्द्रियः' (भा. १.१३.५४); घटाकाश-न्याय से ब्रह्म में विलय (भा. १.१३.५५); पाँचवें दिन देह-त्याग की भविष्यवाणी (भा. १.१३.५७)।

तमोगुण का सेवन — अधर्म से नष्ट दृष्टि

धृतराष्ट्र को 'तमो जुषाणः' और 'अधर्मेण विनष्टदृष्टिः' कहा गया है: 'न याचतोऽदात्समयेन दायं तमो जुषाणो यदजातशत्रोः' (भा. ३.१.६, ८)।