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नारद

Narada

अन्य नाम देवर्षिः · सुरपूजितः · वासवीसुतः · Deva-rishi (the divine sage)

देवर्षि रूप में नैष्कर्म्य-उपदेश

'तन्त्रं सात्वतमाचष्ट नैष्कर्म्यं कर्मणां यतः' (भा. १.३.८)।

पूर्व जन्म: दासी-पुत्र, योगियों की सेवा से आत्म-जागरण

'अहं पुरातीतभवेऽभवं मुने दास्यास्तु कस्याश्चन वेदवादिनाम्' (भा. १.५.२३)।

कृष्ण-कथा श्रवण से रुचि और भक्ति का उदय

'तत्रान्वहं कृष्णकथाः प्रगायतामनुग्रहेणाश्रृणवं मनोहराः' (भा. १.५.२६)।

देवदत्ता वीणा; निरन्तर हरि-कथा गायन

'देवदत्तामिमां वीणां... हरिकथां गायमानश्चराम्यहम्' (भा. १.६.३३)।

नारद — avatara of — श्रीकृष्ण

भगवान् ने 'देवर्षित्वमुपेत्य' सात्वत-तन्त्र का उपदेश दिया (भा. १.३.८); देवर्षि = नारद, सर्वसम्मत पाठ। प्रमाण: प्रबल साक्ष्य।

नारद — taught — सात्वत तन्त्र

नारद ने नैष्कर्म्य-पथ रूप सात्वत-तन्त्र का उपदेश दिया: 'तन्त्रं सात्वतमाचष्ट' (भा. १.३.८)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

नारद — knows tattva of — श्रीकृष्ण

देवर्षि नारद कृष्ण के गुह्यतम प्रभाव के ज्ञाता हैं (भा. १.९.१९)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।