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नारद

Narada

अन्य नाम देवर्षिः · सुरपूजितः · वासवीसुतः · Deva-rishi (the divine sage)

माता का सर्प-दंश से निधन; उत्तर-दिशा प्रस्थान

'सर्पोऽदशत्पदा स्पृष्टः कृपणां कालचोदितः' (भा. १.६.९); 'प्रातिष्ठं दिशमुत्तराम्' (१.६.१०)।

पीपल तले ध्यान; हृदय में हरि का दर्शन

'पिप्पलोपस्थ आश्रितः... हृद्यासीन्मे शनैर्हरिः' (भा. १.६.१६-१७)।

भगवत्-दर्शन का अपहरण; अनुग्रह-वाणी

'सहसोत्तस्थे... नापश्यम्' (भा. १.६.१९-२०); 'गंभीरश्लक्ष्णया वाचा' (१.६.२१)।

प्रलय में भगवान् में प्रवेश; पुनर्जन्म

'विविशेऽन्तरहं विभोः' (भा. १.६.३०); 'मरीचिमिश्रा ऋषयः प्राणेभ्योऽहं च जज्ञिरे' (१.६.३१)।

नारद — visited — वेदव्यास

व्यास के आश्रम में नारद आए: 'कृष्णस्य नारदोऽभ्यागादाश्रमं प्रागुदाहृतम्' (भा. १.४.३२)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

नारद — questioned — ब्रह्मा

नारद ने ब्रह्मा से आत्मतत्त्व का ज्ञान पूछा: 'तद्विजानीहि यज्ज्ञानमात्मतत्त्वनिदर्शनम्' (भा. २.५.१), तथा रूप, अधिष्ठान, उपादान और पर के विषय में (भा. २.५.२)। दिशा: प्रश्नकर्ता → उत्तरदाता। प्रमाण: प्रत्यक्ष।