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नारद

Narada

अन्य नाम देवर्षिः · सुरपूजितः · वासवीसुतः · Deva-rishi (the divine sage)

पुत्र Student Brahma देवता

नारद का ब्रह्मा के साथ सम्बन्ध: पुत्र। स्रोत प्रमाण (SB 2.9.40): नारद ब्रह्मा के पुत्र और उत्तराधिकारियों में प्रियतम हैं: 'तं नारदः प्रियतमो रिक्थादानामनुव्रतः' (भा. २.९.४०); ब्रह्मा ने प्रसन्न होकर 'पुत्राय' भागवत कहा (भा. २.९.४३)। दिशा: पुत्र → पिता। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

नारद का ब्रह्मा के साथ सम्बन्ध: शिष्य। स्रोत प्रमाण (SB 2.4.25): ब्रह्मा ने पूछने पर नारद से वही कहा जो साक्षात् हरि ने उनसे कहा था: 'एतदेवात्मभू राजन् नारदाय विपृच्छते वेदगर्भोऽभ्यधात्साक्षाद्यदाह हरिरात्मनः' (भा. २.४.२५)। दिशा: उपदेष्टा → शिष्य। प्रमाण: प्रत्यक्ष। अतिरिक्त प्रमाण (SB 2.7.51): नारद का ब्रह्मा के साथ सम्बन्ध: शिष्य। स्रोत प्रमाण (SB 2.7.51): ब्रह्मा ने नारद से समस्त भागवत-तत्त्व कहकर उसे विस्तृत करने का आदेश दिया: 'इदं भागवतं नाम यन्मे भगवतोदितम् । सङ्ग्रहोऽयं विभूतीनां त्वमेतद्विपुलीकुरु' (भा. २.७.५१)। दिशा: उपदेष्टा → शिष्य। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

गुरु Vyasa ऋषि

नारद का वेदव्यास के साथ सम्बन्ध: शिक्षक। स्रोत प्रमाण (SB 1.5.40): नारद ने व्यास को भागवत-रचना का निर्देश दिया: 'प्राख्याहि' (भा. १.५.४०) — कृष्ण-महिमा का वर्णन करने के लिए। प्रमाण: प्रत्यक्ष। अतिरिक्त प्रमाण (SB 2.9.44): नारद का वेदव्यास के साथ सम्बन्ध: शिक्षक। स्रोत प्रमाण (SB 2.9.44): नारद ने सरस्वती के तट पर परम ब्रह्म का ध्यान करते हुए अमित-तेजस्वी व्यास से यह भागवत कहा: 'नारदः प्राह मुनये सरस्वत्यास्तटे नृप… व्यासायामिततेजसे' (भा. २.९.४४)। दिशा: उपदेष्टा → शिष्य। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

गुरु Yudhishthira राजा

नारद का युधिष्ठिर के साथ सम्बन्ध: शिक्षक। स्रोत प्रमाण (SB 1.13.41): नारद ने युधिष्ठिर को शोक-निवृत्ति का उपदेश दिया: 'मा कञ्चन शुचो राजन् यदीश्वरवशं जगत्' (भा. १.१३.४१) से लेकर धृतराष्ट्र की योग-गति के कथन तक; उनके वचन को हृदय में धारण कर युधिष्ठिर ने शोक त्याग दिया (भा. १.१३.६०)। दिशा: उपदेष्टा → उपदिष्ट। प्रमाण: प्रत्यक्ष।