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देवता
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ब्रह्मा

Brahma

अन्य नाम विरिञ्चि · धाता · आत्मयोनिः · वेदगर्भः · प्रपितामहः · Svayambhu · Aja (the unborn) · Abja-sambhuta (lotus-born)

नाभिकमल पर जागरण, अन्वेषण और समाधि

भा. ३.८.१५-१६ में वेदमय विधाता लोक-पद्म में स्वयम्भू होते हैं और चार मुख प्राप्त करते हैं। भा. ३.८.१८ में वे चार प्रश्न पूछते हैं — यह कौन है, मैं कौन हूँ, यह अब्ज कहाँ से, और नीचे क्या है। भा. ३.८.१९ में अन्वेषण विफल होता है; भा. ३.८.२० में त्रिनेमि काल का उदय होता है। भा. ३.८.२१-२२ में वे पुनः अपने स्थान पर आकर समाधि-योग से, पुरुषायुषा भर, अन्तर्हृदय में उसे देखते हैं जो पूर्व में नहीं देखा था।

भगवान् की स्तुति और उनसे सृष्टि का आदेश

भा. ३.९.१-२५ में ब्रह्मा भगवान् की स्तुति करते हैं, और स्वीकार करते हैं कि देहधारी उनकी गति को नहीं जान पाते (३.९.१) और वे स्वयं भी उनसे भयभीत हैं (३.९.१८)। भा. ३.९.२६-२८ में वे खिन्न के समान विराम करते हैं और भगवान् अगाध वाणी से उनका कश्मल शमन करते हैं। भा. ३.९.२९-४३ में भगवान् उन्हें तप और विद्या में स्थित होने, और पूर्ववत् प्रजाओं की सृष्टि करने का आदेश देते हैं। भा. ३.९.४४ में भगवान् स्वयं प्रकट होकर यह रूप तिरोहित कर देते हैं।

दिव्य वर्षशत का तप और पद्मकोश का विभाजन

भा. ३.१०.४ में विरिञ्चि दिव्य वर्षशत तक तप करते हैं, अपने आत्मा में आत्मा को आविष्ट कर, जैसा अज भगवान् ने कहा था। भा. ३.१०.६ में बढ़ते तप और आत्म-संस्थ विद्या से वे वायु को जल सहित निपात करते हैं। भा. ३.१०.८ में भगवत्-कर्म से प्रेरित होकर वे पद्मकोश में प्रवेश कर एक को उरुधा विभाजित करते हैं — त्रिधा भाव्य और द्विसप्तधा।

ब्रह्मा — regained memory by — धारणा

ब्रह्मा ने इसी धारणा से प्रसन्न भगवान् से अपनी नष्ट स्मृति पुनः प्राप्त की और पूर्ववत् सृष्टि की: 'एवं पुरा धारणयात्मयोनिर्नष्टां स्मृतिं प्रत्यवरुध्य तुष्टात्' (भा. २.२.१)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

ब्रह्मा — created by glance of — श्रीकृष्ण

ब्रह्मा स्वयं सृष्ट होकर द्रष्टा ईश की ईक्षा से ही प्रेरित होकर सृष्टि करते हैं: 'तस्यापि द्रष्टुरीशस्य कूटस्थस्याखिलात्मनः सृज्यं सृजामि सृष्टोऽहमीक्षयैवाभिचोदितः' (भा. २.५.१७); तथा 'सृजामि तन्नियुक्तोऽहम्' (भा. २.६.३१)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

ब्रह्मा — born from navel lotus of — श्रीकृष्ण

ब्रह्मा महात्मा पुरुष की नाभि-कमल से उत्पन्न हुए: 'यदास्य नाभ्यान्नलिनादहमासं महात्मनः' (भा. २.६.२२); और उन्हें यज्ञ की सामग्री पुरुष के अवयवों के अतिरिक्त कहीं न मिली। दिशा: उत्पन्न → उद्गम। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

ब्रह्मा — saw vaikuntha by grace of — श्रीकृष्ण

सहस्र दिव्य वर्षों के तप से सन्तुष्ट भगवान् ने ब्रह्मा को अपना परम लोक दिखाया: 'तस्मै स्वलोकं भगवान्सभाजितः सन्दर्शयामास परं न यत्परम्' (भा. २.९.९); वहाँ उन्होंने चतुर्भुज रूप का दर्शन किया (भा. २.९.१४–१६)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।