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महाराज परीक्षित

Maharaja Parikshit

अन्य नाम सम्राट् · भागवतोत्तमः · विष्णुरातः · औत्तरेयः · मानवर्धनः · विष्णुरात · Vishnurata

महाराज परीक्षित — awaited death at — गंगा

परीक्षित परमर्षियों से घिरे गंगा-तट पर प्रायोपवेशन कर बैठे: 'प्रायोपविष्टं गङ्गायां परीतं परमर्षिभिः' (भा. १.३.४३)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

महाराज परीक्षित — saw in womb — श्रीकृष्ण

परीक्षित ने गर्भ में ही अङ्गुष्ठ-मात्र चतुर्भुज पुरुष का दर्शन किया, जो गदा से ब्रह्मास्त्र का तेज नष्ट कर रहे थे: 'ददर्श पुरुषं कञ्चिद् दह्यमानोऽस्त्रतेजसा' (भा. १.१२.७–१०)। इसी दर्शन के अनुध्यान से उनका नाम 'परीक्षित्' पड़ा (भा. १.१२.३०)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

महाराज परीक्षित — will be slain by — तक्षक

ब्राह्मणों ने भविष्यवाणी की कि द्विज-पुत्र के शाप से भेजे गए तक्षक से परीक्षित की मृत्यु होगी: 'तक्षकादात्मनो मृत्युं द्विजपुत्रोपसर्जितात्' (भा. १.१२.२७)। दिशा: वध्य → वधकर्ता। प्रमाण: प्रत्यक्ष (भविष्य-कथन)।

महाराज परीक्षित — will subdue — कलियुग

ब्राह्मणों ने कहा कि परीक्षित पृथ्वी और धर्म के लिए कलि का निग्रह करेंगे: 'निग्रहीता कलेरेष भुवो धर्मस्य कारणात्' (भा. १.१२.२६) — यह भा. १.१६–१७ में फलित होता है। प्रमाण: प्रत्यक्ष (भविष्य-कथन)।

महाराज परीक्षित — crowned at — हस्तिनापुर

युधिष्ठिर ने परीक्षित को समुद्र-पर्यन्त पृथ्वी का स्वामी बनाकर हस्तिनापुर में अभिषिक्त किया: 'तोयनीव्याः पतिं भूमेरभ्यषिञ्चद्गजाह्वये' (भा. १.१५.३८)। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

महाराज परीक्षित — subdued — कलियुग

परीक्षित ने दिग्विजय के समय राजा का वेश धारण किए कलि को बल से पकड़ा, जो गौ-बैल के जोड़े को पैर से मार रहा था: 'निजग्राहौजसा वीरः कलिं दिग्विजये क्वचित्' (भा. १.१६.४) — भा. १.१२.२६ की भविष्यवाणी का फल। दिशा: निग्रहकर्ता → निगृहीत। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

महाराज परीक्षित — spared — कलियुग

परीक्षित ने शरणागत कलि का वध नहीं किया: 'पतितं पादयोर्वीरः कृपया दीनवत्सलः शरण्यो नावधीत्' (भा. १.१७.३०) — शरणागत का वध वर्जित है (तुलना: भा. १.७.३६)। दिशा: क्षमा करने वाला → क्षमा-प्राप्त। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

महाराज परीक्षित — restored — धर्म

परीक्षित ने धर्म-रूप वृष के नष्ट तीन पाद — तप, शौच और दया — पुनः जोड़ दिए: 'वृषस्य नष्टांस्त्रीन् पादान् तपः शौचं दयामिति प्रतिसन्दधे' (भा. १.१७.४२)। दिशा: पुनःस्थापक → पुनःस्थापित। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

महाराज परीक्षित — reassured — पृथ्वी

परीक्षित ने पृथ्वी को आश्वस्त कर समृद्ध किया: 'आश्वास्य महीं च समवर्धयत्' (भा. १.१७.४२); पूर्व में 'मा रोदीरम्ब भद्रं ते' (भा. १.१७.९)। दिशा: आश्वासक → आश्वस्त। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

महाराज परीक्षित — offended — शमीक

परीक्षित ने क्षुधा-तृषा से पीड़ित होकर समाधिस्थ शमीक के कन्धे पर मरा सर्प रख दिया: 'स तु ब्रह्मऋषेरंसे गतासुमुरगं रुषा… निधाय पुरमागत्' (भा. १.१८.३०); यह क्रोध उनमें 'अभूतपूर्व' था (भा. १.१८.२९)। दिशा: अपराधी → अपकृत। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

महाराज परीक्षित — questioned — शुकदेव

परीक्षित ने शुक से वह प्रश्न पूछा जिसका उत्तर सम्पूर्ण भागवत है: 'पुरुषस्येह यत्कार्यं म्रियमाणस्य सर्वथा' (भा. १.१९.३७); तथा 'यच्छ्रोतव्यमथो जप्यं यत्कर्तव्यं नृभिः प्रभो' (भा. १.१९.३८)। दिशा: प्रश्नकर्ता → उत्तरदाता। प्रमाण: प्रत्यक्ष।

महाराज परीक्षित — fasted to death at — गंगा

परीक्षित ने गङ्गा के दक्षिण तट पर प्रायोपवेशन किया: 'उपाविशत्प्रायममर्त्यनद्याम्' (भा. १.१९.५); 'उदङ्मुखो दक्षिणकूल आस्ते समुद्रपत्न्याः' (भा. १.१९.१७) — पुत्र पर भार सौंपकर। प्रमाण: प्रत्यक्ष।