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विदुर

Vidura

अन्य नाम क्षत्ता

धृतराष्ट्र-गृह का त्याग और तीर्थ-पर्यटन

धृतराष्ट्र के पुत्र दुर्योधन द्वारा सभा में अपमानित किये जाने पर विदुर ने स्वयं धनुष द्वार पर रखकर हस्तिनापुर त्याग दिया और पुण्य-तीर्थों में पर्यटन करने लगे: 'स्वयं धनुर्द्वारि निधाय मायां गतव्यथोऽयात्' (भा. ३.१.१६-१९)।

यमुना-तट पर उद्धव से मिलन

प्रभास में स्वजनों के विनाश का समाचार सुनकर और सरस्वती के तीर्थों का सेवन करके विदुर यमुना पर पहुँचे और वहाँ भागवत उद्धव को देखा: 'यमुनामुपेत्य तत्रोद्धवं भागवतं ददर्श' (भा. ३.१.२१-२४)।

विदुर — protected — पाण्डव

विदुर ने बालक पाण्डवों की विष और लाक्षागृह की अग्नि आदि विपत्तियों से रक्षा की: 'विपद्गणाद्विषाग्न्यादेर्मोचिता यत्समातृकाः' (भा. १.१३.८); तथा 'सर्वान्नः सुहृदः शिशून् अरक्षतां व्यसनतः पितृव्यौ' (भा. १.१३.३४)। दिशा: रक्षक → रक्षित। प्रमाण: प्रत्यक्ष।