देवी-देवता और दिव्य पात्र
पुराणों से संकलित देवता, ऋषि, राजा, स्थान और सिद्धांत—खोजें, छानें और प्रत्येक प्रोफ़ाइल खोलें।
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सुदास
Sudasaसुदास — एक राजा, जिनके नाम का तीर्थ सरस्वती पर है। भा. ३.१.२२ में विदुर द्वारा सेवित तीर्थों में उनका उल्लेख है: 'तीर्थं सुदासस्य गवां गुहस्…
गुह
Guhaगुह — एक राजा; सरस्वती पर गवां (गवामयन से सम्बद्ध) उनके नाम का तीर्थ है। भा. ३.१.२२ में विदुर द्वारा सेवित तीर्थों की सूची में उनका नाम है: …
प्रभास
Prabhasaप्रभास — सौराष्ट्र-तट का तीर्थक्षेत्र। भा. ३.१.२०-२१ में यह विदुर के पर्यटन का एक पड़ाव है और वही स्थान है जहाँ उन्हें अपने स्वजनों (यदुवंश)…
यमुना
Yamunaयमुना — पवित्र नदी, और विदुर-उद्धव समागम का स्थान। भा. ३.१.२४ में विदुर सरस्वती-तीर्थों से लौटते हुए यमुना पर पहुँचते हैं और वहाँ उद्धव को द…
सौराष्ट्र
Surashtraसुराष्ट्र — पश्चिम का एक समृद्ध देश। भा. ३.१.२४ में विदुर के पर्यटन-पथ में आने वाले देशों में इसका उल्लेख है: 'ततस्त्वतिव्रज्य सुराष्ट्रमृद्…
सौवीर
Sauviraसौवीर — सिन्धु-तट का प्राचीन देश। भा. ३.१.२४ में विदुर के पर्यटन-पथ में आने वाले देशों में इसका नाम है: 'सुराष्ट्रमृद्धं सौवीरमत्स्यान् कुरु…
मत्स्यदेश
Matsya-deshaमत्स्यदेश — कुरुजांगल के समीप का प्राचीन देश। भा. ३.१.२४ में विदुर के पर्यटन-पथ में इसका उल्लेख है: 'सौवीरमत्स्यान् कुरुजाङ्गलांश्च'।
व्रज
Vrajaव्रज — गोपों का चरागाह-क्षेत्र, जिसमें नन्द का व्रज ('नन्दव्रज') आता है; भागवत के दशम स्कन्ध की कथा का मुख्य स्थान। तीसरे स्कन्ध में उद्धव व…
गोप
Gopasगोप — व्रज के गोपाल समुदाय, जिनके राजा नन्द हैं। भागवत में वे कृष्ण के 'अनुग' कहलाते हैं: विभु गोधन चराते समय इनका अनुगमन करते थे और गूँजती …
सान्दीपनि
Sandipaniसांदीपनि — कृष्ण और बलराम के गुरु। भागवत के तीसरे स्कन्ध में उद्धव विदुर को बताते हैं कि कृष्ण ने इनसे एक ही बार कहे गये ब्रह्म (वेद) को सवि…
पंचजन
Pancajanaपंचजन — असुर, जिसके उदर में सांदीपनि का मृत पुत्र था। भा. ३.३.२ में उद्धव कहते हैं कि कृष्ण ने सांदीपनि से एक ही बार कहे गये वेद को सीखकर, ग…
भीष्मक
Bhishmakaभीष्मक — रुक्मिणी के पिता, विदर्भ के राजा। भा. ३.३.३ में उद्धव रुक्मिणी के स्वयंवर का वर्णन करते हुए राजाओं को 'भीष्मककन्यया' बुलाया हुआ बता…
नाग्नजित्
Nagnajitनाग्नजित् — सत्यभामा के पिता, जिनके स्वयंवर में कृष्ण ने विवाह के लिये रखी शर्त पूरी की। भा. ३.३.४ में उद्धव कहते हैं कि कृष्ण ने 'ककुद्मतोऽ…
द्युतरु
Dyutaruद्युतरु, अर्थात पारिजात — स्वर्ग का वृक्ष, जिसे कृष्ण सत्यभामा के लिये पृथ्वी पर लाये। भा. ३.३.५ में उद्धव कहते हैं कि प्रभु, अपनी प्रिया को…
शम्बर
Sambaraशम्बर — असुर, जिसे कृष्ण ने मारा। भा. ३.३.११ में उद्धव उन्हें द्विविद, बाण, मुर और बल्वल तथा दन्तवक्र आदि के साथ गिनते हैं: 'शम्बरं द्विविदं…
द्विविद
Dvividaद्विविद — असुर, भा. ३.३.११ में उन असुरों में गिने गये हैं जिन्हें कृष्ण ने मारा: 'शम्बरं द्विविदं बाणं मुरं बल्वलमेव च'। उद्धव यह सूची विदुर…
बाण
Banaबाण — असुर, भा. ३.३.११ में कृष्ण द्वारा मारे गये असुरों में गिने गये हैं: 'शम्बरं द्विविदं बाणं मुरं बल्वलमेव च'। उद्धव बताते हैं कि कृष्ण न…
मुर
Muraमुर — असुर, भा. ३.३.११ में कृष्ण द्वारा मारे गये असुरों की सूची में हैं: 'शम्बरं द्विविदं बाणं मुरं बल्वलमेव च'। यही सूची उद्धव विदुर को कृष…
बल्वल
Balvalaबल्वल — असुर, भा. ३.३.११ में शम्बर, द्विविद, बाण और मुर के साथ गिने गये हैं, जिन्हें कृष्ण ने मारा। 'बल्वलमेव च' — 'और बल्वल भी' — इस जोड़ म…
दन्तवक्र
Dantavakraदन्तवक्र — असुर, भा. ३.३.११ में 'अन्यांश्च दन्तवक्त्रादीन्' कहकर उन अन्य असुरों के प्रमुख के रूप में नामित हैं जिन्हें कृष्ण ने मारा या मरवा…