देवी-देवता और दिव्य पात्र
पुराणों से संकलित देवता, ऋषि, राजा, स्थान और सिद्धांत—खोजें, छानें और प्रत्येक प्रोफ़ाइल खोलें।
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नैमिषारण्य के ऋषिगण
Sages of Naimisharanyaनैमिषारण्य के ऋषिगण — भागवत-कथा के श्रोता-प्रश्नकर्ता सामूहिक ऋषि-सभा — शौनक के नेतृ्व में हैं। संसाधित पदों में इन्होंने लोक-कल्याण हेतु सह…
सात्वत (यादव कुल)
Satvatasसात्वत — यादव-वृष्णि परम्परा के उस भक्त-कुल का नाम है जिसके स्वामी स्वयं कृष्ण कहलाए; भागवत-परम्परा में 'सात्वत' विष्णु-भक्त यादवों का वाचक …
देवगण
Devas (the suras)देवगण (सुर) — हिन्दू धर्म के दिव्य शक्तियाँ: इन्द्र, अग्नि, वायु आदि के नेतृत्व वाला लोक, जो असुरों के विरुद्ध नैतिक व्यवस्था का पक्ष लेता ह…
असुर
Asurasअसुर — हिन्दू पौराणिक परम्परा के अतिमानवीय प्रतिपक्षी शक्तियाँ: देवों के अनुज-भ्राता कुल, जो अहंकार-प्रधान शक्ति का पक्ष लेती हैं और सुर-असु…
दैत्य
Daityasदैत्य — कश्यप-दिति की सन्तानों का असुर-वर्ग: हिरण्यकशिपु-हिरण्याक्ष आदि का कुल, जो पुराणों में देवों का घोरतम प्रतिपक्ष रहा। भा. १.३.१८: इन्…
वृष्णि कुल
Vrishnisवृष्णि — यादव-संघ का प्रमुख कुल: यदु-वंश की वह शाखा जिसमें कृष्ण-बलराम का जन्म हुआ; परम्परा में सात्वत-वृष्णि सम्बन्ध यादव-राजनीति का केन्द्…
मनुगण
Manusमनु-गण — मन्वन्तर-व्यवस्था के स्वामी पितामह: प्रत्येक कल्प में चौदह मनु, जो सृष्टि के युग-चक्र में धर्म-व्यवस्था के आधार होते हैं (स्वायम्भु…
प्रजापतिगण
Prajapatisप्रजापति-गण — सृष्टि के प्रजननाधिकारी पितामह: ब्रह्मा के मानस-पुत्र (मरीचि, अत्रि, अङ्गिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, वसिष्ठ आदि), जिनसे समस्त …
पाण्डव
Pandavasपाण्डव — पाण्डु के पाँच पुत्र (युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव): महाभारत के नायक, धर्म-राज्य के प्रतीक। भा. १.४.१०: परीक्षित 'पाण्डूनां …
यदुवंशी
Yadusयदु-वंश (यादव) — चन्द्रवंशी राजा यदु से उत्पन्न कुल, जिसमें वृष्णि, अन्धक, भोज और सात्वत शाखाएँ सम्मिलित हैं; कृष्ण और बलराम इसी वंश में प्र…
तुम्बुरु
Tumburuतुम्बुरु — गन्धर्वों में श्रेष्ठ, दिव्य गायक और वीणा-वादक; नारद के साथ उनका सङ्ग पुराणों में बार-बार वर्णित है और दोनों को संगीत-कला का आदर्…
गन्धर्व
Gandharvasगन्धर्व स्वर्गलोक के दिव्य गायक और संगीत के अधिष्ठाता हैं, जो देवसभा में गान करते हैं और अप्सराओं के सहचर माने जाते हैं। वैदिक साहित्य में व…
अप्सरा
Apsarasesअप्सराएँ स्वर्ग की दिव्य नर्तकियाँ हैं, जो समुद्र-मन्थन से प्रकट हुई मानी जाती हैं और इन्द्र की सभा को सुशोभित करती हैं; उर्वशी, मेनका, रम्भ…
पितर
Pitrisपितर पूर्वजों की वह श्रेणी हैं जो मृत्यु के पश्चात् पितृलोक में निवास करते हैं और जिन्हें श्राद्ध, तर्पण तथा पिण्डदान द्वारा तृप्त किया जाता…
मरुद्गण
Marutsमरुत् वायु और तूफान के देवगण हैं, रुद्र के पुत्र और इन्द्र के सहचर, जो ऋग्वेद में चमकते आयुधों और स्वर्ण आभूषणों से युक्त एक साथ गरजते हुए आ…
गोप
Gopasगोप — व्रज के गोपाल समुदाय, जिनके राजा नन्द हैं। भागवत में वे कृष्ण के 'अनुग' कहलाते हैं: विभु गोधन चराते समय इनका अनुगमन करते थे और गूँजती …
भोज
Bhojasभोज — यादव समूहों में से एक, वृष्णि और अन्धक के साथ नामित। भा. ३.३.२४ में नगरी में क्रीड़ा करते 'यदुभोजकुमारकैः' ने भगवन्मत-कोविद मुनियों का…
अंधक
Andhakasअन्धक — यादव समूहों में से एक। भा. ३.३.२५ में 'वृष्णिभोजान्धकादयः' कहकर उन्हें वृष्णि और भोज के साथ गिना गया है; वे सब देवों द्वारा मोहित हो…
दिशाएँ
The Directionsदिशाएँ — समूह, विराट्-पुरुष के कर्णों का अधिष्ठान। भा. ३.६.१७ में: 'कर्णावस्य विनिर्भिन्नौ धिष्ण्यं स्वं विविशुर्दिशः । श्रोत्रेणांशेन शब्दस…
ओषधियाँ
The Herbsओषधियाँ — समूह, विराट्-पुरुष की त्वचा का अधिष्ठान। भा. ३.६.१८ में: 'त्वचमस्य विनिर्भिन्नां विविशुर्धिष्ण्यमोषधीः । अंशेन रोमभिः कण्डूं यैरसौ…