देवी-देवता और दिव्य पात्र
पुराणों से संकलित देवता, ऋषि, राजा, स्थान और सिद्धांत—खोजें, छानें और प्रत्येक प्रोफ़ाइल खोलें।
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नैमिषारण्य
Naimisharanyaनैमिषारण्य — भारत के प्राचीनतम पवित्र तीर्थ-आश्रमों में से एक, जो वर्तमान उत्तर प्रदेश (सीतापुर के पास मिश्रित नैमिष क्षेत्र) में स्थित माना…
पृथ्वी
Earth (Mahi)पृथ्वी (मही/भूमि) — हिन्दू परम्परा में धरती-माता (भूदेवी) के रूप में पूज्य, भारतीय संस्कृति की कृषि-सभ्यता की आधारभूत देवी-धारणा। संसाधित पद…
स्वर्ग
Svarga (heaven)स्वर्ग (त्रिविष्टप) — हिन्दू लोक-विज्ञान का इन्द्र का स्वर्ग-लोक: पुण्य का अस्थायी फल-भोग-स्थान, जहाँ के अधिपति इन्द्र हैं। भा. १.३.१९: वामन…
कीकट प्रदेश
Kikata (region)कीकट — वैदिक-पौराणिक भूगोल का वह प्रदेश (परम्परा में मगध/बिहार से पहचाना जाता है), जहाँ भागवत के अनुसार बुद्ध-अवतार प्रकट होंगे: 'कीकटेषु भव…
कुरुजाङ्गल
Kuru-jangalaकुरुजाङ्गल — कुरु-साम्राज्य का जंगल-प्रदेश: वर्तमान हरियाणा-दिल्ली क्षेत्र; शुकदेव अपने गृह-त्याग के बाद यहीं विचरते हुए पहुँचे: 'संप्राप्तः…
हस्तिनापुर
Hastinapuraहस्तिनापुर — कुरु-राजधानी, महाभारत-युद्ध का केन्द्र; वर्तमान उत्तर प्रदेश (मेरठ जिला) में स्थित पुरातात्विक स्थल। 'गजसाह्वय' नाम से भा. १.४.…
द्वारका
Dvarakaद्वारका — कृष्ण की राजधानी, समुद्र-तट पर बसाई गई सुदृढ़ नगरी, जहाँ जरासन्ध के बार-बार आक्रमणों के कारण उन्होंने मथुरा से यदुवंश को स्थानान्त…
मथुरा
Mathuraमथुरा (मधु-वन) — यमुना-तट पर बसी प्राचीन नगरी, शूरसेन जनपद की राजधानी; कृष्ण की जन्म-भूमि, जहाँ कंस के कारागार में देवकी से उनका प्रादुर्भाव…
कुरुक्षेत्र
Kurukshetraकुरुक्षेत्र — कुरु-वंश के पूर्वज राजा कुरु के नाम से प्रसिद्ध पवित्र क्षेत्र, ब्रह्मावर्त के निकट सरस्वती और दृषद्वती के मध्य स्थित; 'धर्मक्…
जम्बूद्वीप
Jambudvipaजम्बूद्वीप — पौराणिक भूगोल के सप्त द्वीपों में मध्यवर्ती और प्रधान द्वीप, जिसके मध्य में मेरु पर्वत स्थित है; जम्बू (जामुन) वृक्ष की बहुलता …
ब्रह्मावर्त
Brahmavartaब्रह्मावर्त — सरस्वती और दृषद्वती नदियों के मध्य स्थित पवित्र भूभाग, जिसे मनुस्मृति 'देवनिर्मित देश' कहकर वर्णाश्रम-आचार का आदर्श क्षेत्र बत…
वैतरणी
Vaitaraniवैतरणी पुराणों में यमलोक के मार्ग में पड़ने वाली वह भयङ्कर नदी है जिसे पापी जीव को पार करना पड़ता है; वह रुधिर, पीब और तप्त पदार्थों से भरी …
वैकुण्ठ
Vaikunthaवैकुण्ठ भगवान् विष्णु का नित्य धाम है, जो प्रकृति के त्रिगुणों से परे और सृष्टि-प्रलय से अस्पृष्ट माना जाता है; वहाँ के निवासी पार्षद चतुर्भ…
प्रभास
Prabhasaप्रभास — सौराष्ट्र-तट का तीर्थक्षेत्र। भा. ३.१.२०-२१ में यह विदुर के पर्यटन का एक पड़ाव है और वही स्थान है जहाँ उन्हें अपने स्वजनों (यदुवंश)…
सौराष्ट्र
Surashtraसुराष्ट्र — पश्चिम का एक समृद्ध देश। भा. ३.१.२४ में विदुर के पर्यटन-पथ में आने वाले देशों में इसका उल्लेख है: 'ततस्त्वतिव्रज्य सुराष्ट्रमृद्…
सौवीर
Sauviraसौवीर — सिन्धु-तट का प्राचीन देश। भा. ३.१.२४ में विदुर के पर्यटन-पथ में आने वाले देशों में इसका नाम है: 'सुराष्ट्रमृद्धं सौवीरमत्स्यान् कुरु…
मत्स्यदेश
Matsya-deshaमत्स्यदेश — कुरुजांगल के समीप का प्राचीन देश। भा. ३.१.२४ में विदुर के पर्यटन-पथ में इसका उल्लेख है: 'सौवीरमत्स्यान् कुरुजाङ्गलांश्च'।
व्रज
Vrajaव्रज — गोपों का चरागाह-क्षेत्र, जिसमें नन्द का व्रज ('नन्दव्रज') आता है; भागवत के दशम स्कन्ध की कथा का मुख्य स्थान। तीसरे स्कन्ध में उद्धव व…
बदरि
Badariबदर्याश्रम — वह तपोस्थल जहाँ देव नारायण और भगवान् ऋषि नर, लोकों का भावन करने वाले दोनों, दीर्घ और तीव्र किन्तु मृदु तप करते रहे: 'यत्र नाराय…