देवी-देवता और दिव्य पात्र
पुराणों से संकलित देवता, ऋषि, राजा, स्थान और सिद्धांत—खोजें, छानें और प्रत्येक प्रोफ़ाइल खोलें।
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कलियुग
Kali-yugaकलियुग — हिन्दू युग-चक्र का चौथा और अन्तिम युग है (कृत, त्रेता, द्वापर के बाद), जिसमें धर्म का पाद-भाग मात्र रह जाता है और अधर्म बढ़ता है; प…
द्वापरयुग
Dvapara-yugaद्वापरयुग — चार युगों में तृतीय: धर्म के दो पाद रहने का युग, जिसमें व्यास (हरि की कला) जन्मे और महाभारत-युद्ध हुआ। भा. १.४.१४: 'द्वापरे समनु…
मन्वन्तर
Manvantaraमन्वन्तर — काल-विभाग, जिस पर एक मनु का अधिपत्य होता है। भा. ३.७.२५ में विदुर मैत्रेय से पूछते हैं कि प्रजापतियों के पति ने 'सर्गांश्चैवानुसर…
युग
The Yuga Cycleयुग-चक्र — काल-माप, जिसका उल्लेख भा. ३.८.१२ में 'चतुर्युगानां च सहस्रमप्सु स्वपन्' में आता है — भगवान् जल में चतुर्युगों के सहस्र काल तक सोत…
सत्ययुग
Satya-yugaसत्ययुग — जिसे भागवत 'कृत' कहता है, चतुर्युग में प्रथम। भा. ३.११.१८ में चतुर्युग गिनाया गया है: 'कृतं त्रेता द्वापरं च कलिश्चेति चतुर्युगम्'…
त्रेतायुग
Treta-yugaत्रेतायुग — चतुर्युग में द्वितीय। भा. ३.११.१८ में इसका नाम कृत के अनन्तर आता है, और भा. ३.११.१९ में इसकी अवधि तीन सहस्र वर्ष बतायी गयी है, द…
कल्प
Kalpaकल्प — काल-विभाग, ब्रह्मा का एक दिन। भा. ३.११.२२ में: 'त्रिलोक्या युगसाहस्रं बहिराब्रह्मणो दिनम् । तावत्येव निशा तात यन्निमीलति विश्वसृक्' —…