देवी-देवता और दिव्य पात्र
पुराणों से संकलित देवता, ऋषि, राजा, स्थान और सिद्धांत—खोजें, छानें और प्रत्येक प्रोफ़ाइल खोलें।
39 पात्र · पृष्ठ 2/2
रुद्रपार्षद
Rudra-parshadasरुद्रपार्षद — समूह, रुद्र के अनुचर, जो नाभि के व्योम का आश्रय लेते हैं। भा. ३.६.२९ में मैत्रेय कहते हैं: 'तार्तीयेन स्वभावेन भगवन्नाभिमाश्रि…
ब्राह्मण
Brahmanasब्राह्मण — वर्ण, पुरुष के मुख से उत्पन्न। भा. ३.६.३० में: 'मुखतोऽवर्तत ब्रह्म पुरुषस्य कुरूद्वह । यस्तून्मुखत्वाद्वर्णानां मुख्योऽभूद्ब्राह्…
क्षत्रिय
Kshatriyasक्षत्रिय — वर्ण, पुरुष के बाहुओं से उत्पन्न। भा. ३.६.३१ में: 'बाहुभ्योऽवर्तत क्षत्रं क्षत्रियस्तदनुव्रतः । यो जातस्त्रायते वर्णान् पौरुषः कण…
वैश्य
Vaishyasवैश्य — वर्ण, पुरुष की ऊरुओं से उत्पन्न। भा. ३.६.३२ में: 'विशोऽवर्तन्त तस्योर्वोर्लोकवृत्तिकरीर्विभोः । वैश्यस्तदुद्भवो वार्तां नृणां यः समव…
शूद्र
Shudrasशूद्र — वर्ण, पुरुष के चरणों से उत्पन्न। भा. ३.६.३३ में: 'पद्भ्यां भगवतो जज्ञे शुश्रूषा धर्मसिद्धये । तस्यां जातः पुरा शूद्रो यद्वृत्त्या तु…
ग्रह
The Planetsग्रह — समूह, खगोलीय पिण्ड, जिनकी संस्थिति काल के अवयवों से सम्बद्ध है। भा. ३.७.३३ में विदुर मैत्रेय से पूछते हैं: 'ग्रहनक्षत्रताराणां कालावय…
नक्षत्र
The Nakshatrasनक्षत्र — समूह, चन्द्र की नक्षत्र-मण्डलियाँ। भा. ३.७.३३ में इनका उल्लेख 'ग्रहनक्षत्रताराणां कालावयवसंस्थितिम्' में आता है, जहाँ विदुर ग्रह, …
पाखण्ड
The Pakhandasपाखण्ड — समूह, वे पथ जो वैदिक मार्ग से भिन्न माने जाते हैं। भा. ३.७.३१ में विदुर 'पाखण्डपथवैषम्यं प्रतिलोमनिवेशनम्' पूछते हैं — पाखण्ड-पथों …
नाग
The Nagasनाग — समूह, जिनमें नागराज की कन्याएँ भगवान् के चरणोपधान की सेवा करती हैं। भा. ३.८.५ में: 'स्वर्धुन्युदार्द्रैः स्वजटाकलापैरुपस्पृशन्तश्चरणोप…
अप्सरा
Apsarasasअप्सरा — जाति, देव-सर्ग के अन्तर्गत। भा. ३.१०.२७ में मैत्रेय देव-सर्ग को अष्टविध बताते हैं और उसमें विबुध, पितृ, असुर, गन्धर्व, अप्सरा, सिद्…
सिद्ध
Siddhasसिद्ध — जाति, देव-सर्ग के अन्तर्गत। भा. ३.१०.२७ में इनका नाम अप्सराओं के साथ आता है। इस अध्याय में इनका उल्लेख सर्ग-वर्गीकरण के अन्तर्गत ही …
यक्ष
Yakshasयक्ष — जाति, देव-सर्ग के अन्तर्गत। भा. ३.१०.२७ में इनका नाम राक्षसों के साथ आता है: 'गन्धर्वाप्सरसः सिद्धा यक्षरक्षांसि चारणाः'।
राक्षस
Rakshasasराक्षस — जाति, देव-सर्ग के अन्तर्गत। भा. ३.१०.२७ में इनका नाम यक्षों और चारणों के साथ आता है। भागवत इन्हें उसी श्लोक में गिने असुरों से पृथक…
चारण
Charanasचारण — जाति, देव-सर्ग के अन्तर्गत। भा. ३.१०.२७ में इनका नाम उस सूची के अन्त में आता है, जिसमें विबुध, पितृ, असुर, गन्धर्व, अप्सरा, सिद्ध, यक…
भूत
Bhutasभूत — जाति, जिसे भागवत दश सर्गों की अन्तिम सूची में गिनता है। भा. ३.१०.२८ में: 'भूतप्रेतपिशाचाश्च विद्याध्राः किन्नरादयः । दशैते विदुराख्यात…
प्रेत
Pretasप्रेत — जाति, दश सर्गों की अन्तिम सूची में भूतों और पिशाचों के साथ गिनी गयी। भा. ३.१०.२८ में इनका नाम 'भूतप्रेतपिशाचाश्च' में आता है। इस अध्…
पिशाच
Pishachasपिशाच — जाति, दश सर्गों की अन्तिम सूची में भूतों और प्रेतों के साथ गिनी गयी। भा. ३.१०.२८ में इनका नाम 'भूतप्रेतपिशाचाश्च' में आता है, और तदन…
विद्याधर
Vidyadharasविद्याधर — जाति, दश सर्गों की अन्तिम सूची में किन्नरों के साथ गिनी गयी। भा. ३.१०.२८ में: 'विद्याध्राः किन्नरादयः'। नाम स्वयं 'विद्या को धारण…
किन्नर
Kinnarasकिन्नर — जाति, दश सर्गों की अन्तिम सूची में अन्तिम नामित। भा. ३.१०.२८ में इनका नाम 'किन्नरादयः' में आता है, और तदनन्तर मैत्रेय कहते हैं कि य…