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ज्ञान कोश

देवी-देवता और दिव्य पात्र

पुराणों से संकलित देवता, ऋषि, राजा, स्थान और सिद्धांत—खोजें, छानें और प्रत्येक प्रोफ़ाइल खोलें।

320 पात्र · पृष्ठ 15/16

Age

मन्वन्तर

Manvantara

मन्वन्तर — काल-विभाग, जिस पर एक मनु का अधिपत्य होता है। भा. ३.७.२५ में विदुर मैत्रेय से पूछते हैं कि प्रजापतियों के पति ने 'सर्गांश्चैवानुसर…

सिद्धांत

दण्डनीति

Dandaniti

दण्डनीति — शासन की नीति, जिसे भागवत वार्ता के साथ रखता है। भा. ३.७.३२ में विदुर 'वार्ताया दण्डनीतेश्च श्रुतस्य च विधिं पृथक्' पूछते हैं — वा…

सिद्धांत

तपस्या

Tapas

तप — अनुष्ठान, जिसका फल भागवत जीव को अभय देने के आगे नगण्य बताता है। भा. ३.७.४१ में विदुर कहते हैं: 'सर्वे वेदाश्च यज्ञाश्च तपो दानानि चानघ …

ऋषि

सनत्कुमार

Sanatkumara

सनत्कुमार — ऋषि, कुमारों में से एक, जिन्हें भागवत की परम्परा में संकर्षण से उपदेश मिला। भा. ३.८.७ में मैत्रेय कहते हैं: 'प्रोक्तं किलैतद्भगव…

ऋषि

साङ्ख्यायन

Sankhyayana

साङ्ख्यायन — ऋषि, परमहंसों में मुख्य, भागवत की परम्परा में सनत्कुमार और पराशर के बीच की कड़ी। भा. ३.८.७ में उन्हें 'धृतव्रत' कहा गया है और स…

ऋषि

पुलस्त्य

Pulastya

पुलस्त्य — ऋषि, जिनका नाम भागवत की परम्परा में भा. ३.८.९ में आता है। मैत्रेय कहते हैं: 'प्रोवाच मह्यं स दयालुरुक्तो मुनिः पुलस्त्येन पुराणमा…

Group

नाग

The Nagas

नाग — समूह, जिनमें नागराज की कन्याएँ भगवान् के चरणोपधान की सेवा करती हैं। भा. ३.८.५ में: 'स्वर्धुन्युदार्द्रैः स्वजटाकलापैरुपस्पृशन्तश्चरणोप…

वस्तु

ब्रह्म-कमल

The Cosmic Lotus

पद्मकोश — वस्तु, भगवान् की नाभि से उद्भूत लोक-कमल, जिस पर ब्रह्मा प्रकट होते हैं। भा. ३.८.१३ में भगवान् के भीतर का अर्थ, रजस् से भी सूक्ष्मत…

वस्तु

कौस्तुभ

Kaustubha

कौस्तुभ — वस्तु, भगवान् के वक्ष का रत्न। भा. ३.८.३० में ब्रह्मा जिस रूप का ध्यान करते हैं वह 'किरीटसाहस्रहिरण्यशृङ्गमाविर्भवत्कौस्तुभरत्नगर्…

वस्तु

श्रीवत्स

Shrivatsa

श्रीवत्स — वस्तु, भगवान् के वक्षस्थल पर का चिह्न। भा. ३.८.२८ में वे 'हारेण चानन्तधनेन वत्स श्रीवत्सवक्षःस्थलवल्लभेन' वर्णित हैं — अनन्त-धन व…

वस्तु

वनमाला

Vanamala

वनमाला — वस्तु, भगवान् की माला, जिसे भागवत उनकी अपनी कीर्ति से बना बताता है। भा. ३.८.३१ में ब्रह्मा हरि का ध्यान करते हैं, जो 'स्वकीर्तिमय्य…

Age

युग

The Yuga Cycle

युग-चक्र — काल-माप, जिसका उल्लेख भा. ३.८.१२ में 'चतुर्युगानां च सहस्रमप्सु स्वपन्' में आता है — भगवान् जल में चतुर्युगों के सहस्र काल तक सोत…

सिद्धांत

विद्या

Vidya

विद्या — तत्त्व, जिसे भागवत तप के साथ जोड़कर भगवान् के आश्रय वाली बताता है। भा. ३.९.३० में भगवान् ब्रह्मा से कहते हैं: 'भूयस्त्वं तप आतिष्ठ …

सिद्धांत

योग

Yoga

योग — अनुष्ठान, जिसे भागवत निःश्रेयस के साधनों में गिनता है। भा. ३.९.४१ में भगवान् कहते हैं: 'पूर्तेन तपसा यज्ञैर्दानैर्योगसमाधिना । राद्धं …

सिद्धांत

सर्ग

Sarga

सर्ग — सृष्टि, जिसे भागवत दशविध बताता है। भा. ३.१०.१३ में मैत्रेय कहते हैं: 'यथेदानीं तथाग्रे च पश्चादप्येतदीदृशम् । सर्गो नवविधस्तस्य प्राक…

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अप्सरा

Apsarasas

अप्सरा — जाति, देव-सर्ग के अन्तर्गत। भा. ३.१०.२७ में मैत्रेय देव-सर्ग को अष्टविध बताते हैं और उसमें विबुध, पितृ, असुर, गन्धर्व, अप्सरा, सिद्…

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सिद्ध

Siddhas

सिद्ध — जाति, देव-सर्ग के अन्तर्गत। भा. ३.१०.२७ में इनका नाम अप्सराओं के साथ आता है। इस अध्याय में इनका उल्लेख सर्ग-वर्गीकरण के अन्तर्गत ही …

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यक्ष

Yakshas

यक्ष — जाति, देव-सर्ग के अन्तर्गत। भा. ३.१०.२७ में इनका नाम राक्षसों के साथ आता है: 'गन्धर्वाप्सरसः सिद्धा यक्षरक्षांसि चारणाः'।

Group

राक्षस

Rakshasas

राक्षस — जाति, देव-सर्ग के अन्तर्गत। भा. ३.१०.२७ में इनका नाम यक्षों और चारणों के साथ आता है। भागवत इन्हें उसी श्लोक में गिने असुरों से पृथक…

Group

चारण

Charanas

चारण — जाति, देव-सर्ग के अन्तर्गत। भा. ३.१०.२७ में इनका नाम उस सूची के अन्त में आता है, जिसमें विबुध, पितृ, असुर, गन्धर्व, अप्सरा, सिद्ध, यक…