देवी-देवता और दिव्य पात्र
पुराणों से संकलित देवता, ऋषि, राजा, स्थान और सिद्धांत—खोजें, छानें और प्रत्येक प्रोफ़ाइल खोलें।
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भूत
Bhutasभूत — जाति, जिसे भागवत दश सर्गों की अन्तिम सूची में गिनता है। भा. ३.१०.२८ में: 'भूतप्रेतपिशाचाश्च विद्याध्राः किन्नरादयः । दशैते विदुराख्यात…
प्रेत
Pretasप्रेत — जाति, दश सर्गों की अन्तिम सूची में भूतों और पिशाचों के साथ गिनी गयी। भा. ३.१०.२८ में इनका नाम 'भूतप्रेतपिशाचाश्च' में आता है। इस अध्…
पिशाच
Pishachasपिशाच — जाति, दश सर्गों की अन्तिम सूची में भूतों और प्रेतों के साथ गिनी गयी। भा. ३.१०.२८ में इनका नाम 'भूतप्रेतपिशाचाश्च' में आता है, और तदन…
विद्याधर
Vidyadharasविद्याधर — जाति, दश सर्गों की अन्तिम सूची में किन्नरों के साथ गिनी गयी। भा. ३.१०.२८ में: 'विद्याध्राः किन्नरादयः'। नाम स्वयं 'विद्या को धारण…
किन्नर
Kinnarasकिन्नर — जाति, दश सर्गों की अन्तिम सूची में अन्तिम नामित। भा. ३.१०.२८ में इनका नाम 'किन्नरादयः' में आता है, और तदनन्तर मैत्रेय कहते हैं कि य…
सत्ययुग
Satya-yugaसत्ययुग — जिसे भागवत 'कृत' कहता है, चतुर्युग में प्रथम। भा. ३.११.१८ में चतुर्युग गिनाया गया है: 'कृतं त्रेता द्वापरं च कलिश्चेति चतुर्युगम्'…
त्रेतायुग
Treta-yugaत्रेतायुग — चतुर्युग में द्वितीय। भा. ३.११.१८ में इसका नाम कृत के अनन्तर आता है, और भा. ३.११.१९ में इसकी अवधि तीन सहस्र वर्ष बतायी गयी है, द…
कल्प
Kalpaकल्प — काल-विभाग, ब्रह्मा का एक दिन। भा. ३.११.२२ में: 'त्रिलोक्या युगसाहस्रं बहिराब्रह्मणो दिनम् । तावत्येव निशा तात यन्निमीलति विश्वसृक्' —…
मरीचि
Marichiमरीचि ब्रह्मा के दस पुत्रों में प्रथम हैं। भा. ३.१२.२४ के अनुसार वे ब्रह्मा के मन से उत्पन्न हुए। भा. ३.१२.२९ में वे उन मुनियों के प्रमुख है…
अङ्गिरा
Angirasअङ्गिरा ब्रह्मा के दस पुत्रों में गिने गये हैं और भा. ३.१२.२४ के अनुसार ब्रह्मा के मुख से उत्पन्न हुए। अथर्ववेद का 'अथर्वाङ्गिरस' नाम इन्हीं…
पुलह
Pulahaपुलह ब्रह्मा के दस पुत्रों में से हैं; भा. ३.१२.२४ के अनुसार वे ब्रह्मा की नाभि से उत्पन्न हुए।
क्रतु
Kratuक्रतु ब्रह्मा के दस पुत्रों में से हैं; भा. ३.१२.२३ के अनुसार वे ब्रह्मा के हाथ से उत्पन्न हुए।
भृगु
Bhriguभृगु ब्रह्मा के दस पुत्रों में से हैं; भा. ३.१२.२३ के अनुसार वे ब्रह्मा की त्वचा से उत्पन्न हुए।
सनक
Sanakaसनक उन चार मुनियों में प्रथम हैं जिन्हें आत्मभू ब्रह्मा ने सृजा (भा. ३.१२.४)। ये निष्क्रिय और ऊर्ध्वरेता हैं; ब्रह्मा के प्रजा-सृजन के आदेश …
सनन्द
Sanandaसनन्द आत्मभू ब्रह्मा द्वारा सृजित चार मुनियों में दूसरे हैं (भा. ३.१२.४)। अपने भाइयों के साथ इन्होंने भी प्रजा-सृजन के आदेश को अस्वीकार किया…
सनातन
Sanatanaसनातन आत्मभू ब्रह्मा द्वारा सृजित चार मुनियों में तीसरे हैं (भा. ३.१२.४)। ये भी निष्क्रिय और ऊर्ध्वरेता कहे गये हैं।
अधर्म
Adharmaअधर्म ब्रह्मा की पीठ से उत्पन्न हुआ (भा. ३.१२.२५); इनसे लोकभयङ्कर मृत्यु उत्पन्न हुए। यह धर्म का प्रतिद्वन्द्वी तत्त्व है। भा. ३.१२.२९ में ज…
मृत्यु
Mrtyu (Death)मृत्यु अधर्म से उत्पन्न हुए और 'लोकभयङ्कर' कहलाते हैं (भा. ३.१२.२५)। यह मृत्यु का व्यक्तिरूप है।
निरृति
निरृति ब्रह्मा के मेढ़्र से उत्पन्न हुई (भा. ३.१२.२६)। इन्हें 'अघाश्रय' कहा गया है, अर्थात् जिनका आश्रय अघ या अनर्थ है।
Vak
वाक् ब्रह्मा के मुख से उत्पन्न हुईं (भा. ३.१२.२६) और ३.१२.२८ में उनकी तन्वी दुहिता कही गयी हैं। ब्रह्मा ने मन को हर लेने वाली इसी दुहिता को …