देवी-देवता और दिव्य पात्र
पुराणों से संकलित देवता, ऋषि, राजा, स्थान और सिद्धांत—खोजें, छानें और प्रत्येक प्रोफ़ाइल खोलें।
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शृङ्गी
Shringiशृङ्गी — शमीक ऋषि के अत्यन्त तेजस्वी बालक पुत्र। भा. १.१८.३२–३७ में साथियों के साथ खेलते हुए उन्होंने सुना कि राजा ने उनके पिता का अपमान किय…
तुलसी
Tulasiतुलसी — वैष्णव परम्परा की परम पवित्र वनस्पति, विष्णु और कृष्ण की अर्चना में अनिवार्य; उनकी वनमाला और चरण-पूजा तुलसी-दल के बिना पूर्ण नहीं मा…
खट्वाङ्ग
Khatvangaखट्वाङ्ग इक्ष्वाकु-वंश के राजर्षि हैं, जिन्होंने देवासुर-संग्राम में देवताओं की सहायता की थी; प्रसन्न देवताओं ने वर माँगने को कहा तो उन्होंन…
विराट्पुरुष
Virat-Purushaविराट्पुरुष अथवा वैराज पुरुष भगवान् का वह स्थूल विश्वरूप है जिसमें सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड ही उनका शरीर है — पुरुषसूक्त की परम्परा का पुराणिक वि…
प्रणव
Pranavaप्रणव अर्थात् ॐ वह त्रिवृत् (अ-उ-म्) परम अक्षर है जिसे वेद ब्रह्म का ध्वनि-रूप मानते हैं; उपनिषदों में यह ब्रह्म का प्रतीक और ध्यान का आलम्ब…
धारणा
Dharanaधारणा योग के अष्टाङ्गों में छठा अङ्ग है — चित्त को एक देश में बाँधना, जो प्रत्याहार के पश्चात् और ध्यान से पूर्व आता है। भागवत इसे केवल योग-…
मनु
Manuमनु मानव-जाति के आदिपुरुष और धर्मशास्त्र के प्रवर्तक हैं; प्रत्येक मन्वन्तर का अधिपति एक मनु होता है और वर्तमान कल्प में वैवस्वत मनु का शासन…
गन्धर्व
Gandharvasगन्धर्व स्वर्गलोक के दिव्य गायक और संगीत के अधिष्ठाता हैं, जो देवसभा में गान करते हैं और अप्सराओं के सहचर माने जाते हैं। वैदिक साहित्य में व…
अप्सरा
Apsarasesअप्सराएँ स्वर्ग की दिव्य नर्तकियाँ हैं, जो समुद्र-मन्थन से प्रकट हुई मानी जाती हैं और इन्द्र की सभा को सुशोभित करती हैं; उर्वशी, मेनका, रम्भ…
वैतरणी
Vaitaraniवैतरणी पुराणों में यमलोक के मार्ग में पड़ने वाली वह भयङ्कर नदी है जिसे पापी जीव को पार करना पड़ता है; वह रुधिर, पीब और तप्त पदार्थों से भरी …
शिशुमार-चक्र
Shishumara-chakraशिशुमार-चक्र आकाश में ग्रहों और नक्षत्रों का वह विन्यास है जिसे पुराण एक शिशुमार (डॉल्फिन अथवा घड़ियाल) के आकार में देखते हैं, जिसकी पूँछ के…
पितर
Pitrisपितर पूर्वजों की वह श्रेणी हैं जो मृत्यु के पश्चात् पितृलोक में निवास करते हैं और जिन्हें श्राद्ध, तर्पण तथा पिण्डदान द्वारा तृप्त किया जाता…
मरुद्गण
Marutsमरुत् वायु और तूफान के देवगण हैं, रुद्र के पुत्र और इन्द्र के सहचर, जो ऋग्वेद में चमकते आयुधों और स्वर्ण आभूषणों से युक्त एक साथ गरजते हुए आ…
अहङ्कार
Ahankaraअहङ्कार सांख्य-दर्शन का वह तत्त्व है जो महत्तत्त्व से उत्पन्न होता है और जिससे आगे की समस्त सृष्टि निकलती है; इसका स्वरूप 'मैं' और 'मेरा' का…
आकाश
Akashaआकाश पञ्च महाभूतों में प्रथम और सूक्ष्मतम है, जिसका गुण शब्द है। सांख्य और वेदान्त दोनों में यह अवकाश-प्रदाता तत्त्व है जिसमें शेष चारों भूत…
वायु
Vayuवायु महाभूतों में द्वितीय है, जिसका गुण स्पर्श है और जो आकाश से उत्पन्न होने के कारण शब्द-गुण भी धारण करता है। देवता के रूप में वायु प्राण क…
तेज
Tejasतेज पञ्च महाभूतों में तृतीय है, जिसका गुण रूप है और जो पूर्व-अन्वय से स्पर्श तथा शब्द भी धारण करता है। यह अग्नि, प्रकाश, ताप और दृष्टि-सामर्…
जल
Jalaजल अथवा अप् पञ्च महाभूतों में चतुर्थ है, जिसका गुण रस है और जो पूर्व-अन्वय से रूप, स्पर्श और शब्द भी धारण करता है। वैदिक साहित्य में आपः को …
पृथ्वी
Prithviपृथ्वी पञ्च महाभूतों में अन्तिम और स्थूलतम है, जिसका गुण गन्ध है और जो पूर्व-अन्वय से रस, स्पर्श, शब्द और रूप — इस प्रकार पाँचों गुणों से यु…
कर्दम
Kardamaकर्दम प्रजापति ब्रह्मा के मानस-पुत्र और स्वायम्भुव मनु के जामाता हैं, जिन्होंने बिन्दुसरोवर के तट पर दीर्घ तप किया और भगवान् के वरदान से देव…