देवी-देवता और दिव्य पात्र
पुराणों से संकलित देवता, ऋषि, राजा, स्थान और सिद्धांत—खोजें, छानें और प्रत्येक प्रोफ़ाइल खोलें।
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प्रकृति
Prakritiप्रकृति — सांख्य-वेदान्त परम्परा की मूल प्रकृति (प्रधान) है: त्रिगुणात्मक अचेतन सत्ता जिससे महत्-अहंकार-तन्मात्र-इन्द्रियों का सम्पूर्ण भौति…
सत्त्वगुण
Sattva-gunaसत्त्वगुण — प्रकृति के तीन गुणों में प्रथम और श्रेष्ठ है: प्रकाश, पवित्रता, संतुलन और ज्ञान-प्रवृत्ति का स्वभाव — जो चित्त को शान्त और सात्त…
रजोगुण
Rajas-gunaरजोगुण — प्रकृति का द्वितीय गुण है: उन्मेष, वेग, इच्छा और कर्मण्यता का स्वभाव — जो चित्त में काम-लोभ-क्रोधादि उत्पन्न करता है। संसाधित पदों …
तमोगुण
Tamas-gunaतमोगुण — प्रकृति का तृतीय गुण है: अन्धकार, जड़ता, प्रमाद और अज्ञान-प्रवृत्ति का स्वभाव। संसाधित पदों में: इसी से रजस् उत्पन्न होता है (भा. १…
माया
Mayaमाया — भगवान् की स्वीय शक्ति (आत्ममाया) है: वह त्रिगुणात्मक रचनाशीला शक्ति जो निर्गुण ब्रह्म का सगुण विस्तार (जगत्) प्रकट करती है; वेदान्त म…
बलराम
Balaramaबलराम — कृष्ण के बड़े भाई: वसुदेव और रोहिणी के पुत्र, यादव-वीर, हल-धारण (हलायुध) और संकर्षण-तत्त्व की परम्परा वाले; कृष्ण की प्रत्येक लीला म…
पुरुष अवतार
Purusha-avatara (the first cosmic Purusha)पुरुष-अवतार — सृष्टि-आरम्भ में भगवान् का प्रथम ब्रह्माण्डीय रूप: महत् आदि तत्त्वों से निर्मित षोडश-कला पुरुष (भा. १.३.१), जो कारण-जल पर योगन…
महत्तत्त्व
Mahat-tattvaमहत्-तत्त्व — सांख्य-वेदान्त की सृष्टि-योजना का प्रथम प्रकट तत्त्व: 'महान्' बुद्धि-तत्त्व, जिससे अहंकार और आगे का सम्पूर्ण भौतिक विकास होता …
योगनिद्रा
Yoga-nidra (the Lord's mystic slumber)योगनिद्रा — भगवान् की दिव्य निद्रा: कारण-जल पर शयन करते पुरुष-अवतार का योग-स्वभावी निद्रा-विस्तार (भा. १.३.२), जिसके बीच ब्रह्मा नाभि-कमल से…
कुमार
Kumaras (the four celibate boy-sages)चार कुमार — सनक, सनातन, सनन्दन और सनातनकुमार: ब्रह्मा के मानस-पुत्र, जो बाल-ब्रह्मचारी रहकर ज्ञान-भक्ति-मार्ग के आदि आचार्य माने गए; हिन्दू …
वराह
Varahaवराह — विष्णु का तृतीय अवतार (भागवत-क्रम में द्वितीय): सूकर-रूप धारणकर रसातल में डूबी पृथ्वी का उद्धार करने वाले; पुराण-परम्परा में हिरण्याक…
पृथ्वी
Earth (Mahi)पृथ्वी (मही/भूमि) — हिन्दू परम्परा में धरती-माता (भूदेवी) के रूप में पूज्य, भारतीय संस्कृति की कृषि-सभ्यता की आधारभूत देवी-धारणा। संसाधित पद…
नारद
Naradaनारद — ब्रह्मा के मानस-पुत्र, देवर्षि: त्रैलोक्य-सन्देशवाहक, वीणाधारी भक्ति-प्रचारक। भा. १.३.८ में भगवान् का तृतीय अवतार; भा. १.५-६ में व्या…
सात्वत तन्त्र
Satvata-tantraसात्वत-तन्त्र — नारद द्वारा उपदिष्ट वह शास्त्र जो नैष्कर्म्य — कर्मों के बंधन के अंत — का मार्ग बताता है (भा. १.३.८); परम्परा में पंचरात्र-आ…
कपिल
Kapilaकपिल — सांख्य-दर्शन के आदि-आचार्य: परम्परा में कर्दम-देवहूति के पुत्र कपिलदेव, जिन्होंने माता को सांख्य-ज्ञान दिया (भागवत स्कन्ध ३ का कपिल-स…
आसुरि
Asuriआसुरि — प्राचीन ऋषि, सांख्य-परम्परा में कपिल के प्रमुख शिष्य (परम्परा में पंचशिख की परम्परा इन्हीं से जुड़ी)। भा. १.३.१०: 'प्रोवाचासुरये सां…
सांख्य
Samkhya (the doctrine)सांख्य — भारत के षड्-दर्शनों में प्राचीनतम: कपिल-प्रणीत तत्त्व-गणना वाला दर्शन, जो पुरुष-प्रकृति विवेक द्वारा मुक्ति बताता है। भा. १.३.१० मे…
दत्तात्रेय
Dattatreyaदत्तात्रेय — वैष्णव परम्परा के प्रसिद्ध योगी-देवता: अत्रि-अनसूया के पुत्र, विष्णु के अंशावतार, जिन्हें 'दत्त' (दान किया हुआ पुत्र) कहा गया; …
अत्रि
Atriअत्रि — सप्तर्षियों में एक महर्षि: ब्रह्मा के मानस-पुत्र, अनसूया के पति; ऋग्वेद के पाँचवें मण्डल का ऋषि-कुल इन्हीं का है। भा. १.३.११: भगवान्…
अनसूया
Anasuyaअनसूया — अत्रि-पत्नी, पातिव्रत्य की पराकाष्ठा के लिए प्रसिद्ध सती; परम्परा में इन्हीं की कोप-मुक्ति से त्रिमूर्ति-पुत्र (दत्तात्रेय, दुर्वास…